रक्षाबंधन (श्रावण पूर्णिमा) के दिन साल में सिर्फ एक दिन खुलने वाला मंदिर का ऐतिहासिक रहस्य–
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-SAMAJJAGRAN 24TV-
कृष्णराज अरुण
चमोली/देहरादून
उत्तराखंड के चमोली जिले में साल में केवल एक दिन खुलने वाला प्रसिद्ध मंदिर बंसी नारायण मंदिर (या वंशी नारायण मंदिर) है। यह अनोखा मंदिर चमोली की खूबसूरत उर्गम घाटी में समुद्र तल
से करीब 12,000 फीट (3,580 मीटर) की ऊंचाई पर स्थित है।इस मंदिर के कपाट साल के 364 दिन बंद रहते हैं और केवल रक्षाबंधन (श्रावण पूर्णिमा) के दिन ही सूर्योदय से सूर्यास्त तक श्रद्धालुओं के लिए खोले जाते हैं।
इस मंदिर से जुड़ी खास बातें और पौराणिक मान्यताएं नीचे दी गई हैं:–
🗺️ भौगोलिक स्थिति और यात्रा–यह भगवान विष्णु (नारायण) को समर्पित एक प्राचीन मंदिर है, जिसका निर्माण लगभग 8वीं सदी में माना जाता है। उर्गम घाटी के देवग्राम से इस मंदिर तक पहुँचने के लिए एक बेहद खूबसूरत लेकिन कठिन बुग्यालों (घास के मैदानों) और जंगलों से होकर ट्रैकिंग करनी पड़ती है।
माता लक्ष्मी की राखी: भगवान विष्णु के पाताल लोक जाने से चिंतित माता लक्ष्मी को नारद मुनि ने राजा बलि को राखी बांधने का उपाय सुझाया। माता लक्ष्मी ने इसी स्थान पर आकर राजा बलि को रक्षासूत्र बांधा और उपहार में अपने पति भगवान विष्णु को मांग लिया। पाताल से मुक्त होने के बाद भगवान विष्णु ने सबसे पहले इसी स्थान पर दर्शन दिए थे।
🧔 इंसानों और देवताओं की पूजा का रहस्य–
+ स्थानीय लोगों का दृढ़ विश्वास है कि साल के बाकी 364 दिन इस मंदिर में कोई इंसान नहीं, बल्कि स्वयं देवर्षि नारद भगवान नारायण की पूजा करते हैं। इसलिए बाकी दिनों में यहाँ मनुष्यों का जाना वर्जित होता है।महिलाओं द्वारा पहली राखी: रक्षाबंधन के दिन जब सुबह मंदिर के कपाट खुलते हैं, तो सबसे पहले स्थानीय महिलाएँ भगवान नारायण को राखी बांधती हैं और उन्हें मक्खन, घी व दूध का भोग लगाती हैं।
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