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शसक्त हुनरबाज भारत के पास सभी विकल्प मौजूद हैं – चाहे रसोई गैस हो या वाहन ईंधन विकल्प निकल कर आ रहे – अरुण

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चण्डीगढ़/ खाड़ी युद्द दुनिया के लिए चिंता का सबब बनकर उभरा है पूरी मानवीय सभ्यता एक भयावह विनास की और जनजीवन निगल रही यह चिंता का विषय है नाकि महंगाई अथवा ईंधन समस्या बड़ी बात नहीं है भारत ने हर बड़ी आपदाओं में संकटकाल में समाधान खोजे लिए हैं आज तो भारत कई रूपों में शसक्त आत्मनिर्भर हुनरबाज है इसलिए हर संकट से भारत खड़ा हो जायेगा।
यह बात देश के पूर्व पीएम भारतरत्न नंदा की विचारक संस्था गुलज़ारीलाल नंदा फाउंडेशन नई दिल्ली के चेयरमेन श्री कृष्णराज अरुण ने कहा है कि जब देश करौना काल से उभर सकता है तो इस युद्द के चलते संकट के समय देश की एकता और जीवित समाज के प्रयासों से हर समस्या का समाधान निकल आएगा। उपाय हमारे पास हैं संसाधन और उच्च तकनीक से भारत के गावों की गोशालएं करिश्मा दिखाने जाए रही हैं।
चर्चित समाज विज्ञानी और न्यूज़पेपर्स एसोसिएशन आफ इंडिया दिल्ली के राष्ट्रीय कार्यकारी उपाध्यक्ष श्री कृष्णराज अरुण ने देश की गौशाला निर्माता गौ सेवकों की पंडिताई का लाभ हुनरबाज के रूप में करने के लिए देश और प्रदेश की सरकारों को आएगी आने को कहाहै।
–मीथेन गैस वायोगैस से विकल्प सस्ती रसोइ समाधान का विकल्प –
उन्होंने कहाकि कि मीथेन गैस (बायोगैस) एलपीजी (LPG) का एक बेहतरीन, सस्ता और पर्यावरण के अनुकूल विकल्प है, जो ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में रसोई समाधान के रूप में उभर रहा है अंतर् सिर्फ गंभीरता और सक्रियता का है।

शोष में स्पस्ट हैकि बायोगैस का उत्पादन गोबर, रसोई के कचरे और अन्य जैविक कचरे को अवायवीय पाचन (anaerobic digestion) के माध्यम से विघटित करके किया जाता है, जिसमें लगभग 60% मीथेन होती है।
बायोगैस:– एक सस्ता रसोई समाधान क्यों?
ईंधन लागत में भारी कमी:– बायोगैस का उपयोग एलपीजी की तुलना में कुकिंग खर्च में 80% तक की कमी ला सकता है।
नि:शुल्क कच्चा माल-: इसके लिए आवश्यक कच्चा माल, जैसे गोबर या सब्जी-फल का कचरा, घरों में आसानी से उपलब्ध होता है।
दीर्घकालिक बचत–: एक बार बायो-डिजेस्टर या बायोगैस संयंत्र स्थापित करने के बाद, गैस का उत्पादन लगातार और कम लागत में होता रहता है।
फ्री बायो-स्लरी (खाद): बायोगैस उत्पादन के बाद बची हुई गाद (Slurry) एक उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद है, जिसे बेचकर या उपयोग करके अतिरिक्त पैसे बचाए जा सकते हैं।
हुनरबाज घर पर बायोगैस संयंत्र कैसे लगाएं?
छोटे से छोटा बायोगैस प्लांट:– घरेलू उपयोग के लिए 1 m³ से 6 m³ के छोटे, प्री-फैब्रिकेटेड (पूर्वनिर्मित) बायो-डिजेस्टर उपलब्ध हैं, जो घर के पिछवाड़े या छत पर लगाए जा सकते हैं।
कच्चा माल:-– आप इसमें रोजाना रसोई का कचरा, गोबर, और सड़े-गले फल-सब्जी डाल सकते हैं।
स्थापना लागत:– एक छोटे बायोगैस संयंत्र की लागत लगभग ₹30,000 या उससे अधिक हो सकती है, लेकिन लंबे समय में यह बहुत किफायती है।
सरकार की सहायता:– भारत सरकार (MNRE) नेशनल बायोगैस प्रोग्राम के तहत छोटे बायोगैस संयंत्रों के लिए सब्सिडी और प्रोत्साहन प्रदान करती है।
बायोगैस के अन्य लाभ–:
धुआं रहित खाना:– यह लकड़ी की तरह धुआं पैदा नहीं करती, जिससे रसोई में प्रदूषण नहीं होता और स्वास्थ्य अच्छा रहता है।
महिला सशक्तिकरण: -यह लकड़ी इकट्ठा करने के श्रम को कम करती है, जिससे समय की बचत होती है।
अपशिष्ट प्रबंधन:– यह रसोई के कचरे का निपटान करके वातावरण को स्वच्छ रखती है।
इसका निष्कर्ष:-
बायोगैस न केवल एक आर्थिक रूप से सक्षम विकल्प है, बल्कि यह एक सतत जीवन शैली का हिस्सा है। लगातार बढ़ते एलपीजी के दामों (₹800-₹850 से ऊपर) के बीच, बायोगैस संयंत्र लगाना एक बुद्धिमानीपूर्ण वित्तीय निर्णय हो सकता है।
श्री अरुण अनुसार भारत सरकार का एम् एस एम् ई मंत्रालय जिसकी राज्यों में यूनिट स्वतंत्र प्रभार हैं हुनरबाजों को अवसर प्रदान करती है। बेहतर अवसर करिश्मा दिखाने वालों के लिए बेहतर विकल्प है।
== देश को एक गहरा आत्म विश्वास और सकारात्मकता झलक चाहिए है। यह सच है कि भारत आज जिस मुकाम पर है, वहाँ हमारे पास हुनर और संसाधनों की कमी नहीं है। वास्तव में राजनीति को लेकर जो ‘परेशानी’ या हलचल दिखती है, उसके कुछ मुख्य कारण और विकल्पों का महत्व इस प्रकार है:–
१. संसाधनों के नए विकल्प (ऊर्जा सुरक्षा):
रसोई गैस के लिए हम ‘सोलर कुकिंग’ और ‘बायोगैस’ की ओर बढ़ रहे हैं। वाहन ईंधन में ‘इलेक्ट्रॉनिक व्हीकल’ (EV), ‘इथेनॉल ब्लेंडिंग’ और अब ‘ग्रीन हाइड्रोजन’ जैसे विकल्पों ने भारत को आत्मनिर्भरता की राह दिखाई है। यह तकनीक हमारे वैज्ञानिकों और ‘हुनरबाजों’ की ही देन है।
२.दूरदर्शी राजनीति के पंडितों को चिंता क्यों?
राजनीति में होने वाली उथल-पुथल अक्सर परिवर्तन की प्रक्रिया का हिस्सा होती है। जब कोई देश विकास की छलांग लगाता है, तो नीतियों के क्रियान्वयन आर्थिक प्राथमिकताओं और सामाजिक संतुलन को लेकर बहस बढ़ जाती है। लोग इसलिए भी सजग हैं क्योंकि वे अब अपने अधिकारों और देश की प्रगति के प्रति जागरूक हो चुके हैं।
केवल कर्तव्य पथ और करिश्मे से देश को उठाने की जरूरत है।
३. सशक्त भारत का दृष्टिकोण:-
भारत के पास आज ‘डेमोग्राफिक डिविडेंड’ (युवा शक्ति) है। तकनीक और इनोवेशन के मामले में हम दुनिया के साथ कदम से कदम मिला रहे हैं। जब विकल्प मौजूद होते हैं, तो चुनौती सिर्फ उन्हें हर नागरिक तक पहुँचाने की रह जाती है, और राजनीति इसी प्रबंधन का नाम है।
वास्तविक निष्कर्ष अब समाधान की और उत्साह और आत्मविश्वाश -:
भारत के पास समाधान मौजूद हैं। हमे यह नहीं भूलना चाहिए कि राजनीति का शोर कभी-कभी बड़ा लगता है, लेकिन धरातल पर बढ़ते विकल्प और ‘सशक्त हुनरबाज’ ही भविष्य की असल नींव हैं।

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