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रैगिंग मामले में कालेज का प्रबंधन बराबर का जिम्मेदार। देश के पहले राष्ट्रपति के नाम को खराब करने वाले कालेज के प्रबंधकों पर भी यूजीसी को करनी होगी कड़ी कारर्वाई। मामला हिमाचल प्रदेश के टांडा स्थित डॉ. राजेंदऱ प्रसाद मेडिकल कॉलेज में रैगिंग के आरोपी 12 छात्रों को सस्पेंड करने का जिम्मेदार-

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मामला हिमाचल प्रदेश के टांडा स्थित डॉ. राजेंदऱ प्रसाद मेडिकल कॉलेज में रैगिंग के आरोपी 12 छात्रों को सस्पेंड करने का-

देश के पहले राष्ट्रपति के नाम को खराब करने वाले कालेज के प्रबंधकों पर भी यूजीसी को करनी होगी कड़ी कारर्वाई।

चंडीगढ़/कांगड़ा -अखिलेश बंसल – समाज जागरण 24 tv- ब्यूरो टीम –

भारत की सर्वोच्चय न्यायालय के सख्त आदेशों के बावजूद शिक्षण संस्थानों में चल रही रैगिंग की घटनाओं के बावजूद अंकुश नहीं लगने के लिए कालेज के प्रबंधक भी बराबर के जिम्मेदार हैं। एक दिन पहले हिमाचल प्रदेश के टांडा स्थित डॉ. राजेंदऱ प्रसाद मेडिकल कॉलेज में उजागर हुए रैगिंग के मामले और आरोपी 12 छात्रों को सस्पेंड करने की घटना ने भारत देश के पहले राष्ट्रपति के नाम को खराब करने का दुःसाहस किया है। जिसके लिए कालेज के प्रबंधकों पर कारर्वाई करने के लिए यूजीसी को भी सख्ती दिखानी होगी।

दुनिया में रैगिंग से 1873 में हुई थी पहली मौत।
रैगिंग को दुनिया में हेजिंग, फेगिंग, बुलिंग, प्लेजिंग और हॉर्स प्लेइंग के नाम से भी जाना जाता है। 18वीं शताब्दी के दौरान महाविद्यालयों में छात्र संगठन बनाने का विशेष रूप से यूरोपीय देशों में प्रचलन शुरू हुआ था। सूत्रों के अनुसार रैगिंग की वजह से दुनिया में पहली मौत 1873 में हुई जब न्यूयॉर्क की कॉरनेल यूनिवर्सिटी की इमारत से गिरकर एक जूनियर छात्र की मौत हो गई थी। उसके बाद यह प्रचलन भारत में दाखिल हुआ। भले ही यह डेटा उपलब्ध नहीं हो सका है लेकिन बता दें कि भारत के शिक्षण संस्थानों में रैगिंग शुरु होने के बाद एक एक कर कई छात्रों की मौत हुई, बहुत छात्र बिना पढ़ाई किए सीनियर छात्रों की प्रताड़ना से बचकर कालेजों से बाहर आ गए, बहुत से छात्रों के परिवार जिन्होंने बच्चों की पढ़ाई के लिए इधर उधर से कर्ज उठाया वह सदा के लिए कर्जयी हो गए।

राज्य सरकारों ने भी बनाए हैं कानूनः
विभिन्न राज्य सरकारों ने रैगिंग को लेकर अपने नियम-कानून बनाए हैं, इनमें कारावास से लेकर अर्थ दंड तक के सख्त प्रावधान किए गए हैं। जिस राज्य में संस्थान स्थापित है, उस पर यूजीसी के साथ ही राज्य सरकार की ओर से बनाए गए कानून लागू हैं। त्रिपुरा सरकार ने रैगिंग आरोपितों के खिलाफ चार वर्ष, महाराष्ट्र ने दो वर्ष, उत्तर प्रदेश ने दो वर्ष, छत्तीसगढ़ ने पाँच वर्ष तक के कारावास के साथ ही सभी राज्यों ने अर्थदंड का प्रावधान भी कर रखा है।

रैगिंग पर देश में है पूर्ण प्रतिबंधः
देश में बढ़ती घटनाओं को देखते भारत की माननीय सुप्रीम कोर्ट ने साल 2001 में रैगिंग पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था। शिक्षण संस्थानों के प्रबंधकों की नजरन्दाजी के चलते रैगिंग नहीं रुकी। देश के किसी न किसी कोने से रैगिंग की शिकायत आम होती चली गई और मारपीट,मानसिक प्रताड़ना, स्टूडेंट्स की खुदकुशी तक की घटनाएं सामने आई। रैगिंग की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए यूजीसी की ओर से कानून सख्त कर दिए।

हिमाचल CM सुखविंदर सरकार विशेष प्रावधान बनाये – – (हिमाचल की पवित्र भूमि में और कितने खौफ -)

 

हर राज्य में हो विशेष एंटी रैगिंग कमेटीः
देश के भूतपूर्व प्रधानमंत्री भारतरत्न गुलजारी लाल नंदा के शिष्य कृष्ण राज अरुण जो गुलजारी लाल नंदा फाउंडेशन के चेयरमैन हैं, वरिष्ठ पत्रकार भी हैं ने हिमाचल में हुई रैगिंग की घटना के मामले में कहा है कि रैगिंग जैसी घटनाएं किसी कैंसर जैसे रोग से हटकर नहीं। इसे खत्म करने के लिए इनकी जड़ों को मिटाना होगा। हर राज्य तथा हर शिक्षण संस्थान में एंटी रैगिंग कमेटी का गठन करना होगा। इस कमेटी में टीचिंग-नॉन टीचिंग स्टाफ, विद्यार्थी, बच्चों के परिजन, इलाके के पुलिस अधिकारी, मीडिया कर्मी, समाजसेवी महिलों को भी अनिवार्य करना होगा। ऐसी किसी घटनाओं तथा घटनाओं को नजरन्दाज करने वाले कालेजों की प्रबंध समितियों पर नजर रखने के लिए यूजीसी के नियमोंबनाना होगा। हर शिक्षण संस्थान में जगह जगह हेल्पलाइन टोल फ्री नंबर लिखने होंगे। अगर पीड़ित होते स्टूडेंट एंटी रैगिंग कमेटी की ओर से लिए गए एक्शन से संतुष्ट नहीं है तो उसके पास निकटतम सिविल और पुलिस प्रसाशनिक कार्यालय जाकर आरोपितों और कालेज प्रबंधन के खिलाफ सीधी शिकायत दर्ज कराने का अधिकार प्राप्त हो। यदि किसी भी कालेज में कोई ऐसी घटना घटती है तो यूजीसी को उस कालेज की ग्रांट पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का अधिकार हो।

देश के प्रथम राष्ट्रपति का नाम किया बदनामः
डॉ. राजेंद्र प्रसाद भारतीय राजनीतिज्ञ, वकील, पत्रकार, विद्वान और एवं महान भारतीय स्वतंत्रता सेनानी थे, जिन्होंने 1950 से 1962 तक भारत के प्रथम राष्ट्रपति के रूप में कार्य किया। वे भारतीय स्वाधीनता आंदोलन के प्रमुख नेताओं

– – हिमाचल की पवित्र भूमि में और कितने खौफ –

 

में से थे और उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष के रूप में प्रमुख भूमिका निभाई। उन्होंने भारतीय संविधान के निर्माण में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया था। राष्ट्रपति होने के अतिरिक्त उन्होंने भारत के पहले मंत्रिमंडल में 1946 से 1947 तक कृषि और खाद्यमंत्री का दायित्व भी निभाया। जो दुनिया में बाबू जी नाम से भी जाने गए उन्हें भारत सरकार ने भारत रत्न से भी निवाजा।

यह बताया मामला-
गत दिनों हिमाचल प्रदेश के दूसरे सबसे बड़े अस्पताल डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज टांडा में रैगिंग का नया मामला सामने आया। सीनियर छात्रों ने जूनियर छात्रों के साथ रैगिंग की और उन्हें लगातार टॉर्चर भी किया। पूरी जांच के बाद कालेज प्रबंधन ने आरोपी 12 सीनियर छात्रों को सस्पेंड कर दिया गया। इन छात्रों को कॉलेज से 3 महीने के लिए, हॉस्टल से 6 महीने के लिए निलंबित कर दिया गया। साथ ही इन पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। हालांकि राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. भानु अवस्थी ने बताया है कि हमारी फ्लाइंग स्क्वायड हॉस्टल में रह रहे छात्रों की रूटीन चेकिंग करती रहती है। जब फ्लाइंग स्क्वायड ने हॉस्टल की चेकिंग की तो वहां जूनियर छात्रों के पास सीनियर छात्रों की कॉपियां पाई गई। मामले को गंभीरता से लिया और अपने स्तर पर पूरी जांच-पड़ताल की। रिपोर्ट आने के बाद सारा मामला एंटी रैगिंग कमिटी के पास भेज दिया गया। सोमवार को इसकी पहली रिपोर्ट आई तो 6 सीनियर छात्रों पर कार्रवाई की गई। उनके माता-पिता को कॉलेज में बुलाया गया था। बुधवार को दूसरी रिपोर्ट आने के बाद 6 छात्र और दोषी पाए गए। इसके बाद कॉलेज प्रबंधन ने सभी 12 सीनियर छात्रों को सस्पेंड कर दिया है। गौरतलब है कि हिमाचल में ही कुछ रोज पहले भी नेरचौक मेडिकल कालेज में भी रैगिंग का मामला सामने आया था। इस पर कॉलेज प्रबंधन ने कड़ा संज्ञान लेते हुए आरोपी 4 छात्रों और 2 छात्राओं को निलंबित कर दिया था।

डॉ. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कालेज एवं अस्पताल टांडा में रैगिंग का मामला सामने आया है। यहां पर कॉलेज प्रशासन ने एंटी रैगिंग एक्ट के तहत टांडा अस्पताल के 12 वरिष्ठ ट्रेनी डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई की है, जबकि दो जूनियर ट्रेनी डॉक्टरों को चेतावनी दी है।

 

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