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भारत के लिए बेहद खास है यह मिशन—चंद्रयान-3 का 13 जुलाई को होगा प्रक्षेपण, ISRO ने बताया शेड्यूल–

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–समाज जागरण 24tv –
     कृष्ण राज अरुण
नई दिल्ली / भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने भारत के चंद्र मिशन ‘चंद्रयान-3’ के लॉन्च होने की तारीख बताई है। अधिकारियों ने आज घोषणा की कि रॉकेट 13 जुलाई को स्थानीय समयानुसार दोपहर 2:30 बजे लॉन्च किया जा सकता है। चंद्रयान-3 का फोकस चंद्रमा की सतह पर सुरक्षित लैंड करने पर है। इसरो के अध्यक्ष एस सोमनाथ के मुताबिक, अंतरिक्ष के क्षेत्र में ये भारत की एक और बड़ी कामयाबी होगी।
चंद्रयान-2 के बाद इस मिशन को चंद्रमा की सतह पर सुरक्षित लैंडिंग की क्षमता की जांच के लिए भेजा जा रहा है। चंद्रयान-2 मिशन आखिरी चरण में विफल हो गया था। उसका लैंडर पृथ्वी की सतह से झटके के साथ टकराया था, जिसके बाद पृथ्वी के नियंत्रण कक्ष से उसका संपर्क टूट गया था। चंद्रयान-3 को उसी अधूरे मिशन को पूरा करने के लिए भेजा जा रहा है। इसमें लैंडर के चंद्रमा की सतह पर उतरने के बाद उसमें से रोवर निकलेगा और सतह पर चक्कर लगाएगा।
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इसरो प्रमुख ने कहा कि भारत 2047 तक अंतरिक्ष के क्षेत्र में अग्रणी राष्ट्र होगा। इसके लिए हमें अंतरिक्ष को देश की रणनीतिक संपत्ति के रूप में देखना होगा। इसके लिए हमें अपनी क्षमता का निर्माण करना चाहिए और इसे बनाए रखने के लिए इसे आत्मनिर्भर बनाना चाहिए। इसरो प्रमुख यहां भारतीय वायु सेना के 38वें एयर चीफ मार्शल पीसी लाल स्मारक व्याख्यान में बोल रहे थे। कार्यक्रम में वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल वीआर चौधरी समेत वायु सेना के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।
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अधिकारियों के मुताबिक, चंद्रयान-3 को आंध्र प्रदेश स्थित श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से प्रक्षेपण यान मार्क-3 के जरिये प्रक्षेपित किया जाएगा. प्रणोदक मॉड्यूल ‘लैंडर’ और ‘रोवर’ को 100 किलोमीटर तक चंद्रमा की कक्षा में ले जाएगा. इसमें, चंद्रमा की कक्षा से पृथ्वी के ध्रुवीय मापन का अध्ययन करने के लिए एक ‘स्पेक्ट्रो-पोलरमेट्री’ पेलोड भी जोड़ा गया है.बता दें कि इससे पहले 7 सितंबर 2019 को भारत के दूसरे चंद्र मिशन ‘चंद्रयान-2’ की चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग नहीं हो पाई थी. इसे चंद्रमा की सतह के दक्षिण ध्रुव के पास उतरना था. यह जब चंद्रमा की सतह पर उतरने वाला था तब लैंडर विक्रम से उसका संपर्क टूट गया था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी उस समय ऐतिहासिक क्षण के गवाह बनने के लिए बेंगलुरु स्थित इसरो के मुख्यालय में पहुंचे थे।

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