हरियाणा के ऐतिहासिक क्षेत्र भूरेवाला गांव नारायणगढ के लिए गुलजारीलाल नंदा फाउंडेशन ने ऐतिहासिक विकास के लिए जैव खाद विष मुक्त शुद्ध खादयान गौधन नाडेप कंपोस्ट खाद योजना बनाई–
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चंडीगढ़/मोरनी भूरेवाला विलेज – (समाज जागरण 24 टीवी ब्यूरो)
हरियाणा के ऐतिहासिक क्षेत्र भूरेवाला गांव नारायणगढ के लिए गुलजारीलाल नंदा फाउंडेशन ने मोरनी हिल्स के लिए ऐतिहासिक विकास के लिए योजना बनाई–
जैव खाद विष मुक्त शुद्ध खादयान–
गौधन नाडेप कंपोस्ट खाद (NADEP Compost) परियोजना एक मुख्य स्तंभ है। (https://gulzarilalnandafoundation.com/our-projects/)
1990 के बाद से जैविक खाद की ओर लौटने का अभियान शुरू हुआ , जो अब भी जारी है | द्वितीय हरित क्रांति में जैविक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है और किसानो को इसके लिएतैयार किया जा रहा है | किसान भी जैविक खाद और कीटनाशक बनाने में अपने अनुभव से कृषि वैज्ञानिक तक को मात दे रहे है | जैविक खेती हर दृष्टि से सुरक्षित और ज्यादा मुनाफा देने वाली है |
सस्ती खाद करे इस्तेमाल–
जैविक खेती में जैविक खाद और जैविक कीटनाशको का इस्तेमाल होता है | भारतीय किसानो के लिए यह कोई नया विषय नही है | यह जरुर है कि रासायनिक खाद और कीटनाशको के प्रयोग को लेकर चले अ
भियान ने जैविक किसानो को कुछ समय के लिए अपने उपर निर्भर बना दिया है जबकि एक बार अधिकतर किसान सस्ती और नुकसानदायक खेती की ओर बढ़ रहे है | इस अन्तराल में जैविक खेती को लेकर कई नये प्रयोग हुये है जो खेती के लाभ के दायरे को बढाते है |रासायनिक और महंगी खाद की जगह हम इन खादों का इस्तेमाल कर सस्ती , टिकाऊ और स्वस्थ खेती का लाभ ले सकते है |
महाराष्ट्र पुसाद के नाडेप काका गांधीवादी प्रयोग से आविष्कार हुआ इस नाडेप खाद –
दस साल में किसानो और बागवानी नर्सरी योजना में हरित क्रांति ला दी। 2007 में गुलजारीलाल नंदा फाउंडेशन के गुरुग्राम में अविनास नाडेप को समाज गौरव पुरस्कार दिया गया .
गुलज़ारीलाल नंदा फाउंडेशन चेयरमेन समाज विज्ञानी श्री कृष्णराज अरुण ने NAADEP नाडेप गौधन विकास योजना जनकल्याण केंद्र के कार्यकर्ता अध्यापक की जिम्मेदरी ली।हरियाणा हिमाचल में प्रसार किया।निरंतर प्रयास के बाद हरियाणा फील्ड आफीस प्रयोग केंद्र पर विचार किया गया।

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