सोशल मिडिया में चर्चा अफवा इसे ज्यादा महत्व न दें-PIB Fact Check ने स्पष्ट किया भाखड़ा नागल बांध टूटने की चर्चा आई ?- अगर टूटा तो कितनी हानि की संभावना किन राज्यों में ज्यादा-
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कृष्णराज अरुण
samaj jagran24tv.
भाखड़ा नांगल बांध पूरी तरह से सुरक्षित है और सोशल मीडिया पर इसके टूटने या इसकी दीवार में 1.77 इंच का खतरनाक झुकाव आने की खबरें पूरी तरह से झूठी अफवाह और निराधार हैं। भारत सरकार की आधिकारिक संस्था PIB Fact Check ने स्पष्ट किया है कि 27 अगस्त 2026 को बांध की दीवार का वास्तविक झुकाव (डिफ्लेक्शन) मात्र 0.86 इंच था, जो पानी के दबाव के कारण पूरी तरह से सामान्य इंजीनियरिंग डिजाइन का हिस्सा है। बांध के सभी सुरक्षा मानक (Stress, Strain, Seepage) पूरी तरह सुरक्षित सीमा के भीतर हैं।
लोगों की भ्रमित स्थिति का आंकलन—-चूंकि यह एक काल्पनिक सवाल है कि “अगर यह बांध टूट जाए तो क्या होगा”, तो एक अत्यंत संवेदनशील और बड़े कंक्रीट ग्रेविटी बांध के टूटने की स्थिति में होने वाले संभावित नुकसान का विवरण नीचे दिया गया है:
सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले राज्य
भाखड़ा नांगल बांध मुख्य रूप से सतलुज नदी पर बना है। इसके टूटने की स्थिति में पानी का बहाव निचले समतल मैदानी इलाकों की तरफ होगा, जिससे निम्नलिखित राज्यों में भारी तबाही की संभावना होगी:
पंजाब: भौगोलिक रूप से बांध के सबसे नजदीक होने के कारण सबसे पहला और भीषण प्रभाव पंजाब पर पड़ेगा।
हरियाणा: पंजाब से सटा होने के कारण हरियाणा के निचले और मैदानी इलाके बुरी तरह जलमग्न हो जाएंगे।
राजस्थान: यह इस परियोजना का साझीदार राज्य है, जिसके उत्तरी हिस्से बाढ़ से प्रभावित हो सकते हैं।
हिमाचल प्रदेश: बांध का जलाशय (गोविंद सागर) हिमाचल में है, इसलिए बांध के टूटने पर इसके आस-पास के निचले इलाकों पर गहरा असर पड़ेगा।
दिल्ली: पानी की भारी मात्रा और नदियों के उफान के चलते दिल्ली के निचले इलाकों में भी बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है।
संभावित हानियां (काल्पनिक परिदृश्य)
भीषण बाढ़ और शहरों की तबाही
गोविंद सागर जलाशय में करीब 9.34 बिलियन क्यूबिक मीटर पानी की विशाल क्षमता है।
बांध टूटने पर पानी सुनामी की रफ्तार से बहेगा। इससे आनंदपुर साहिब, रूपनगर, लुधियाना, फिरोजपुर, अंबाला और चंडीगढ़ जैसे बड़े शहरों के डूबने का खतरा रहेगा।
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PIB Fact Check on X: “
विभिन्न सोशल मीडिया हैंडल्स द्वारा एक वीडियो साझा कर दावा किया जा रहा है कि वर्तमान में भाखड़ा नांगल बांध की दीवार में 1.77 इंच का झुकाव आया है और बांध की दीवार टूटने पर दिल्ली समेत कई शहरों के बाढ़ में डूबने की आशंका है। #PIBFactCheck
यह दावा भ्रामक है।
PIB 27.08.2026 को”पीआईबी भारत सरकार की एजेंसी ने ख़रिज किया कहा की पूरी अफ़वाह है –

इस परियोजना से लगभग 1325 मेगावाट जल-विद्युत (Hydroelectricity) का उत्पादन होता है।
इसके बंद होने से पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश सहित पूरे उत्तर भारत में बिजली ठप हो जाएगी।
कृषि और उपजाऊ भूमि का विनाश
यह बांध उत्तर भारत के करीब 40,000 वर्ग किलोमीटर खेतों की सिंचाई करता है।
पानी के तेज बहाव से लाखों हेक्टेयर खड़ी फसलें और मिट्टी की उपजाऊ परत नष्ट हो जाएगी। आने वाले कई सालों तक उस जमीन पर खेती करना नामुमकिन हो जाएगा।
पेयजल की भारी किल्लत
पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के करोड़ों लोगों के पीने के पानी का मुख्य स्रोत यही बांध और इससे निकलने वाली नहरें (जैसे भाखड़ा नहर) हैं। इसके नष्ट होने से पानी के लिए त्राहि-त्राहि मच जाएगी।
राहत और पुनर्वास में दशकों का समय
जान-माल का नुकसान इतना बड़ा होगा कि लाखों लोगों को विस्थापित करना पड़ेगा। अर्थव्यवस्था को वापस पटरी पर लाने में देश को कई साल या दशक लग सकते हैं।
निष्कर्ष: भाखड़ा बांध को वैश्विक स्तर की बेहतरीन इंजीनियरिंग से बनाया गया है। भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) और आईआईटी के विशेषज्ञ इसकी सुरक्षा की चौबीसों घंटे निगरानी करते हैं। इसलिए सोशल मीडिया की भ्रामक खबरों पर विश्वास न करें और पैनिक न फैलाएं।
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