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गौधन गोबर उत्पादों से राज्य को मजबूत आय श्रोत दिलाने में उद्यमियों को तैयार करेगा गुलज़ारीलाल नंदा फाउंडेशन – -कृष्ण राज अरुण

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चंडीगढ़ /नारायणगढ़ – हरियाणा में पर्यावरण की शुध्दता एवं जल जंगल जमीन के महत्व को मजबूती दिलाने के लिए नए वर्ष को प्रदूषण मुक्ति का जागृति मिशन को लेकर गुलज़ारीलाल नंदा फॉउण्डेशन विभिन्न स्तरों पर कदम उठाने की तैयारी में हिमालय से जुड़े राज्यों में जैविक राज्य बनाने की तैयारी की जारही है।
यह जानकारी उद्यमी विकास योजना जनकल्याण केंद्र एमएसएमई अंतर्गत राज्य के अंचलों में गौधन शक्ति से उत्पन्न गोबर से विभिन्न प्रयोगों द्वारा रसोई गैस से लेकर देसी खाद और जैव उर्वरक बनाने में किया जायेगा। गोबर उत्पाद के महत्व से देश में किये जा रहे प्रयोग को हरियाणा में और भी मजबूत आदर्श मॉडल देकर इससे मजबूत मॉडल द्वारा गोबर से पेंट, पेपर, बैग, ईंट, टायल्स और प्लास्टर ,गौकाष्ठ लकड़ी और दिवाली दिए बनाए जाने की कौशल विकास यात्रा को मजबूत किया जाएगा ताकि ग्राम उदयमी रोजगार विकल्प में मजबूत हो सकें।
भारतरत्न नंदा स्मृति में यह योजना भारत नवनिर्माण के क्षेत्र में उद्यमियों के लिए एक अलग शक्ल होगी जिसका लक्ष्य सड़कों में आवारा गाय ना दिखें इसके लिए गौ संरक्षण के मॉडल को मजबूती दिलाने के लिए जीवित समाज को भागीदारी से जोड़ा जाएगा। भारतरत्न नंदा के परम् शिष्य श्री अरुण ने कहा कि गाय के गोबर से बने घरों में एटॉमिक रेडिएशन का कोई असर नहीं होता. गौमूत्र से भी लाइलाज बीमारियों को ठीक किया जा सकता है. यही वजह है कि आज देसी गाय पालन को प्रमोट किया जा रहा है।
हमारा मिशन जनकल्याण केंद्र द्वारा 18 महीनों में राज्य के हर अंचल तक जनकल्याण केंद्र द्वारा यह ग्रामीण इलाकों में आमदनी का अहम जरिया बने इसके लिए मजबूत आकर्षक उत्पाद तैयार होंगे। मजबूत आर्थिक आधार मिलने से गाय सड़कों में नहीं घरों में दिखेगी क्योंकि पहले गाय के दूध से जो कमाई होती थी लोग उसे ही इनकम मानते थे। लेकिन जब से इको-फ्रैंडली का नारा बुंलद हुआ है, तब ही से गाय के गोबर से लेकर गौमूत्र से तमाम उत्पाद बनाए जा रहे हैं। यह परम सत्य हैकि गाय के दूध में औषधीय गुण मौजूद होते हैं. इसके दूध से बने घी की विदेश में भारी मांग है, जबकि इसके गौमूत्र से आज कैंसर की दवाएं तक बनाई जा रही है।
अरुण ने कहा कि वे राज्य सरकार के लिए एक ऐसा मॉडल तैयार कर रहे हैं जिससे सरकार यदि गौधन विकास के लिए मंत्रालय बनाती है तो वे इस मंत्रालय की विकास यात्रा को मजबूत लक्ष्य से जोड़ने के लिए खजाने को मजबूत बनाने के विकल्प बनाएंगे। अरुण के अनुसार बदलाव के युग में हम भूल रहे हैंकि देशी गाय के दूध और घी में गंभीर रोगों के निदान में काफी मदद मिलती है। गाय के दूध में विटामिन ए पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है जो आँखों में होने वाले रतोंधी रोग की रोकथाम के लिए आवश्यक है। इसके साथ विटामिन बी 12 व राइबोफ्लेविन भी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है जो हृदय को स्वस्थ रखने में सहायक होता है।
गाय का गोबर उत्पाद से बना घर हमेशा कैसी भी गर्मी में तापमान घटाने में चर्चित है। गोबर से बना सीमेंट ईंटें घर में वास्तु दोष मिटाती हैं जहरीले कीट पतंगे घर से दूर रहते हैं। भारतीय संस्कृति में गाय घरों में दोष हरने वाली वह देविक शक्ति है जिससे घर हमेशा विपत्तियों से दूर रहता है।

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