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कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड अपने संस्थापक अध्यक्ष को स्मृति सम्मान में भारतरत्न गुलजारीलाल नंदा के योगदान चित्रण गीता जयंती से नदारत क्यों ?

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केडीबी के संस्थापक भारतरत्न गुलजारीलाल नंदा के योगदान चित्रण गीता जयंती से नदारत क्यों ?

चंडीगड़ /कुरुक्षेत्र – ब्यूरो हरियाणा – हरियाणा में गीता जयंती का परचम दुनिया के आगे भगवान श्री कृष्ण के गीता ज्ञान का अनुसरण संसार करे को लेकर कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के अधिकारी जोर शोर से पर्यटन विभाग के साथ मिलकर धर्मनगरी कुरुक्षेत्र को सजाया गया है तमाम सभी आकर्षक चित्रण किये गए हैं जिनसे धर्मनगरी का वजूद चार चाँद लगा रहा है मगर कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के अधिकारी अपने इस संस्थान केडीबी के संस्थापक के 22 साल के महान योगदान को दर्शाना भूल गए हैं जिसके लिए पूर्व प्रधानमंत्री भारतरत्न गुलज़ारीलाल नंदा ने अपना राजनैतिक जीवन के ऐश्वर्य छोड़ भगवान श्री कृष्ण की गीता उपदेश स्थलियों से जुडी महाभारत रणभूमि के वजूद कोई दुनिया के सामने लाने में २२साल तक रात दिन एक किये।
भारतरत्न गुलज़ारीलाल नंदा की महान निष्काम सेवा तपस्या से 1968 अगस्त में कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड की स्थापना की गयी थी उनके साद प्रयास से जितने भी सीएम आये उन्होंने नंदा जी योगदान को महत्व्देते धर्म क्षेत्र के लिए भरसक प्रयास दिखाए मगर इन सबसे ज्यादा चौधरी बंसी लाल सरकार ने नंदा जी के कार्यों को यज्ञ मानकर सबसे अधिक अपने गुरु तुल्य नंदा जी के योगदान को कुरुक्षेत्र के विकास में समर्पण दिखाया था परिणाम स्वरूप कुरुक्षेत्र जिला बना और विकास अंगड़ाई में नंदा जी के नेतत्व में विश्व चर्चित ब्रह्मसरोवर सरोवर सहित तमाम तीर्थ विकास के ध्वझा बने।
गुलज़ारीलाल नंदा फाउंडेशन सदैव से इस पपक्ष में रहा की नंदा जी की बनाई संस्था कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के आधीन नंदा जी की समाधी सदाचार स्थल देखरेख सदैव करे मगर आर्थिक कारणों के चलते तत्कालीन केडीबी के चेयरमेन महा महिम रहे डा ए आर किदवई के समझाने पर गुलज़ारीलाल नंदा फाउंडेशन सहमत हुआ और 30 साल के लिए लीज पर कुरुक्षेत्र विश्व विद्यालय देख रेख में उनकी समाधी म्यूजियम दी गयी। आज यथा समर्थ कुवि तो अपना धर्म निभा रहा है मगर केडीबी गीता जयंती में भी नंदा जी के महान कार्यों का उल्लेख करना भूल जाता है।
भारतरत्न नंदा के परम शिष्य संस्था चेयरमेन श्री कृष्णराज अरुण का कहना हैकि गुलज़ारीलाल नंदा फॉउण्डेशन केवल और केवल नंदा जी के नाम से नैतिक पुरुस्कार वार्षिक समारोह में आयोजन में देने तक सिमित है इसकी वजह साफ़ हैकि गैर अनुदानित यह संस्था बिना चंदे के संस्था सदस्यों की आस्था अनुसार केवल प्ररचार प्रसार तक सिमित है इसलिए वःह ऐसे समारोह में पोस्टर इत्यादि फ्लेक्स नहीं कर पाती अन्थया 50 हजार तक के पोस्टर फ्लेक्स गीता जयंती में नंदा जी के केडीबी कार्यकाल वर्र्णन क्र र देती।
गुलज़ारीलाल नंदा फाउंडेशन ने गीता जयंती से काफी पहले नए केडीबी सदस्यों का स्वागत करते हुए गीता जयंती में नंदा योगदान को दर्शाने को आग्रह किया था मगर मूक दर्शक उदासीनता ने अनदेखी की है।जबकि कायदे में कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड मुख्य द्वार पर संस्थापक चित्र उनका वर्णन होना चाहिए।

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