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करौना की बढ़ती रप्तार एक बार फिर राज्य अंचलों तक – सतर्कता कितनी जरूरी –

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         – कृष्णराज अरुण –
—samaj jagran 24tv —
चंडीगड़्/ अम्बाला – करौना के हाहाकार लोगों की जिंदगियां निगलने में राक्षस के रूप में उसका स्वरूप अभी ठीक तरह से लोगों के दिलो दिमाग से हटा भी नहीं था कि 2025 का मई महीना एकाएक कोविड ने एक साथ कई जगह मरीजों की रप्तार अस्पतालों में देखने सुनने को मिलती जा रही है। यानी लोग फिर घरों में कैद हो जायेंगे खुद को परिवार को बचाने की जुगत में नजर आएंगे।
महाराष्ट्र मुंबई में एक साथ कई केस कुछ मौतें जो हुई उन्होंने हिला कर रख दिया। गाजियाबाद दिल्ली यमुनागर करनाल इत्यादि में केसों का मिलना चौकाता है कि किसतरह बड़ी तादाद को चपेट में आने से पहले रोका कैसे जाय ताकि यह सक्रमण आगे न बढ़ सके लोगों का सम्भलना सावधानी बरतना जरूरी है।

मुँह में मास्क अनिवार्य सेनेटाइजर होना और घरों में आसपास पानी एकत्रित ना हो मछरों की दुरी आवश्यक है। लोग बुखार में सीधे सरकारी अस्पताल जांच कराएं खांसी बुखार को हल्के में ना लें। बच्चों को बाहरी खानपान घुलना मिलना पाबंदी लगाई जाय।
क्या सोचता है इंसान इस महामारी के प्रवेश पर –
कितना घातक था पिछला इतिहास जो कुछ साल पहले तक करौना ने असंख्य परिवार खोये थे। शमसान में जगह नहीं थी डाह संस्कार के लिए – दहस्त के माहौल से आजतक कांप जाते है पिछला इतिहास याद आते ही। आज फिर अज्ञात डर भविष्य को लेकर कई अनुमान हैं. लेकिन, ये सभी इस बात पर निर्भर करते हैं कि सरकारें और समाज कोरोना वायरस को कैसे संभालते हैं जबकि इंतजाम संसाधन इंतजाम तैयारियां कितनी मजबूत हैं समझना होगा। सबसे बड़ी बात और इस महामारी का अर्थव्यवस्था पर क्या असर होगा. उम्मीद है कि हम इस संकट के दौर से एक ज़्यादा बेहतर, ज़्यादा मानवीय अर्थव्यवस्था बनकर उभरेंगे. यदि सबने सतर्कता समझदारी पाबंदियों को अमल किया तो महामारी हराना बड़ी बात नहीं है लेकिन, अनुमान यह भी है कि हम सतर्क नहीं हुए तो ला परवाही में कहीं अधिक बुरे हालात में भी जा सकते हैं।
आक्सीजन के इंतजाम – स्वछता पर ध्यान – सक्रमण रोकने वाले प्रयोग पर ध्यान – आते जाते सफर में एक दूसरे से दुरी – मास्क जरूरी – मछर वाले स्थानों पर धुआं जरुरुरी। नालियां साफ़ हों। ऐसे जीव दूर रखिये जिनसे सक्रमण पैदा होते हैं – प्रसाशन को जानकारी दीजिये। बाजारों का खानपान शुध्द जगह सही जगह कीजिये।

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