CBI ने FCI, नेरामैक और दिल्ली सरकार के अधिकारियों पर कसा शिकंजा- सरकारी राशन में एक बड़े घोटाले का पर्दाफाश -27 अगस्त को एफआईआर दर्ज
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– कृष्णराज अरुण –
नई दिल्ली Samajjagran24tv ब्युरो-
दिल्ली सरकार के अधिकारियों से जुड़ा 28.87 करोड़ रुपये का चावल घोटाला सामने आया है, जिसकी जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) कर रही है।
🔎 मुख्य मामला और अनियमितताएं-
नियमों का उल्लंघन: ओपन मार्केट सेल स्कीम (OMSS) के नियमों के अनुसार, केवल राज्य सरकारें ही बिना ई-नीलामी (E-auction) के सीधे चावल के आवंटन के लिए पात्र थीं।
📋 सीबीआई (CBI) की कार्रवाई-
अधिकारियों पर शिकंजा: सीबीआई ने एफसीआई के तत्कालीन अधिकारियों, नेरामैक के अधिकारियों और दिल्ली सरकार के कुछ विभागीय कर्मचारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
दस्तावेजों की जांच: आवंटन से जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड, फाइलों और गोदामों के स्टॉक रजिस्टर को जब्त कर जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि चावल की वास्तविक डिलीवरी कहां की गई।
🔎 मुख्य मामला और अनियमितताएं–
गलत आवंटन: एफसीआई अधिकारियों ने नियमों को ताक पर रखकर पूर्वोत्तर क्षेत्रीय कृषि विपणन निगम (NERAMAC) को दिल्ली सरकार के कोटे के तहत चावल आवंटित कर दिया।
निजी व्या
पारियों को फायदा: इस चावल को कथित तौर पर दिल्ली के कल्याणकारी विभागों या राशन प्रणाली तक पहुंचाने के बजाय, निजी व्यापारियों और मिल मालिकों को खुले बाजार में बेचकर मुनाफा कमाया गया।
वित्तीय नुकसान: इस हेरफेर और बाजार दर से कम कीमत पर अनाज उठाने के कारण सरकारी खजाने को 28.87 करोड़ रुपये का सीधा नुकसान हुआ है।
बीते दिनों जब इस संबंध में दिल्ली सरकार के मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा से इस संबंध में सवाल पूछा गया था, तो उन्होंने कहा था कि उन्होंने सिर्फ एफसीआई के पास अग्रसारित कर दिया था. वहीं विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान जब आम आदमी पार्टी ने चावल घोटाले का आरोप लगाया तो विधानसभा में सिरसा ने कहा कि दिल्ली सरकार ने न कोई चावल खरीदा न बेचा. लेकिन अब सीबीआई ने 27 अगस्त को इस मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
रियायती दर पर 62 हजार मीट्रिक टन चावल आवंटित करने का मामला-
CBI की FIR के मुताबिक मामला FCI के दिल्ली रीजन से नॉर्थ ईस्टर्न रीजनल एग्रीकल्चर मार्केटिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड (NERAMAC) को रियायती दर पर चावल आवंटित किए जाने से जुड़ा है. दस्तावेज के अनुसार FCI ने NERAMAC को कुल 62,000 मीट्रिक टन चावल आवंटित किया था, जिसमें से करीब 50,645 मीट्रिक टन चावल उठाया गया. यह चावल 23,200 रुपये प्रति मीट्रिक टन की रियायती दर पर दिए जाने की बात FIR में कही गई है, जबकि उस समय इसकी रिजर्व कीमत 28,900 रुपये प्रति मीट्रिक टन थी.
कौड़ियों के भाव खरीदा, खुले बाजार में बेचा –
जांच में सामने आया है किअसम की दो और कोलकाता की एक कंपनी ने नॉर्थ ईस्टर्न रीजनल एग्रीकल्चर मार्केटिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड के ज़रिए फूड कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया से गैर-कानूनी तरीके से 50,645 मीट्रिक टन चावल हासिल किया. यह चावल दिल्ली में रहने वाले आम लोगों, दिहाड़ी मजदूरों, श्रमिक वर्ग और प्रवासी कामगारों को किफायती दरों पर चावल उपलब्ध कराने के नाम पर लिया गया था, जो राशन कार्ड न होने के कारण सार्वजनिक वितरण प्रणाली के दायरे में नहीं आते थे. लेकिन कंपनियों ने इसे निजी बाज़ार में बेच दिया और जनवरी से मई 2026 के बीच सिर्फ़ पांच महीनों में 28.87 करोड़ का गलत तरीके से मुनाफा कमाया।
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