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लोधा गांव में राजा महेंद्र प्रताप सिंह विश्वविद्यालय महान स्वतंत्रता सेनानी, समाज सुधारक और शिक्षाविद् इतिहास-

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-लोधा (अलीगढ़) में स्थित राजा महेंद्र प्रताप सिंह राज्य विश्वविद्यालय- (महान स्वतंत्रता सेनानी, समाज सुधारक -Ex MP 1957-1962मथुरा से)

कृष्णराज अरुण
संपादक समाज जागरण 24टीवी-
नई दिल्ली(अलीगढ़)राजा महेंद्र प्रताप सिंह ने अफगानिस्तान में भारत की अंतरिम सरकार बनवाई थी। यह दौर स्वतंत्रता आंदोलन के चरम पर था। अंग्रेज़ों ने वर्ष 1923 में राजा पर दबाव डाला, उन्हें रियासत से बेदख़ल कर संपत्ति व्यवसाय में ले लिया।

वे मथुरा से दो बार 1962 तक लोक सभा संसद सदस्‍य भी रहे-
लोधा (अलीगढ़) में स्थित राजा महेंद्र प्रताप सिंह राज्य विश्वविद्यालय महान स्वतंत्रता सेनानी, समाज सुधारक और शिक्षाविद् राजा महेंद्र प्रताप सिंह के सम्मान और स्मृति में स्थापित एक प्रमुख राजकीय विश्वविद्यालय है।
विश्वविद्यालय का संक्षिप्त इतिहास और भूगोल–
स्थापना और शिलान्यास: इस विश्वविद्यालय की आधारशिला 14 सितंबर 2021 को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा रखी गई थी। वर्ष 2026 में यह विश्वविद्यालय अपना 5वां स्थापना दिवस मना रहा है।

स्थान: यह स्थाई परिसर अलीगढ़ के कोल तहसील के लोधा गांव और मूसेपुर करीम जरौली गांव में 92 एकड़ से अधिक भूमि पर फैला हुआ है (पसवल रोड, लोधा)।
उद्देश्य: अलीगढ़ संभाग के छात्रों को आधुनिक उच्च शिक्षा प्रदान करना और राजा साहब के महान राष्ट्र निर्माण के योगदान को आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाना है।

राजा महेंद्र प्रताप सिंह का गौरवशाली इतिहास-
आपने उनके जीवन के बिल्कुल सही और महत्वपूर्ण पहलुओं को रेखांकित किया है। उनका ऐतिहासिक योगदान इस प्रकार है:
अफगानिस्तान में पहली निर्वासित सरकार (1915): प्रथम विश्व युद्ध के दौरान, उन्होंने 1 दिसंबर 1915 को अफगानिस्तान के काबुल में भारत की पहली अस्थायी/निर्वासित सरकार (Provisional Government of India) का गठन किया था। इस सरकार में वे स्वयं राष्ट्रपति थे और मौलाना बरकतुल्लाह खान इसके प्रधानमंत्री बने थे।
अंग्रेजों का दमन और संपत्ति ज़ब्ती (1923): स्वतंत्रता आंदोलन में उनकी क्रांतिकारी गतिविधियों से घबराकर ब्रिटिश सरकार ने उन पर भारी दबाव डाला। उन्हें देश से निर्वासित घोषित कर दिया गया और साल 1923 के आसपास उनकी रियासत और संपत्ति को जब्त कर लिया गया था।
मथुरा से लोकसभा सांसद (1957-1962): आजादी के बाद वे भारतीय राजनीति में सक्रिय हुए। वे 1957 से 1962 तक मथुरा लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीतकर संसद सदस्य (MP) रहे। इस ऐतिहासिक चुनाव में उन्होंने भारतीय जनसंघ के प्रत्याशी अटल बिहारी वाजपेयी को हराया था।
शिक्षा के लिए दानवीरता: राजा महेंद्र प्रताप सिंह अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) के पूर्व छात्र रहे थे और उन्होंने AMU के लिए अपनी जमीन पट्टे (लीज) पर दी थी। इसके अलावा उन्होंने 1909 में वृंदावन में ‘प्रेम महा विद्यालय’ नाम से देश का पहला तकनीकी संस्थान भी स्थापित किया था।

 

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