अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) बनाने वाली कंपनियों को कड़ी फटकार लगाई
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samajjagran24tv
नई दिल्ली / के आर अरुण – अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने टेक कंपनियां खुद ‘फ्रेंकस्टीन’ जैसी खतरनाक तकनीक का निर्माण कर रही हैं और फिर उससे बचने के लिए सरकार से वैश्विक नियमों की मांग कर रही हैं, जो पूरी तरह से गलत रवैया है।
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का यह बयान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के नियमन (regulation) और टेक कंपनियों की जिम्मेदारी को लेकर चल रही वैश्विक बहस को उजागर करता है।
उन्होंने मैरी शेली के मशहूर उपन्यास ‘फ्रेंकस्टीन’ (Frankenstein) का उदाहरण देकर टेक जगत पर बड़ा तंज कसा है। इस उपन्यास में वैज्ञानिक विक्टर फ्रेंकस्टीन एक ऐसा जीव (मॉन्स्टर) बना देता है, जो बाद में उसके नियंत्रण से बाहर हो जाता
है और खुद उसके विनाश का कारण बनता है।
जेडी वेंस के इस बयान के मुख्य बिंदु और उनके मायने इस प्रकार हैं:
1. खुद संकट पैदा करना और फिर मदद मांगना
कंपनियों का दोहरा रवैया: वेंस का मानना है कि टेक कंपनियां व्यावसायिक लाभ के लिए तेजी से खतरनाक और शक्तिशाली AI टूल्स बना रही हैं।
जिम्मेदारी से बचना: जब ये तकनीकें उनके नियंत्रण से बाहर होने लगती हैं, तो वही कंपनियां सरकारों के पास जाकर वैश्विक नियम बनाने की गुहार लगाती हैं ताकि जोखिम की जिम्मेदारी दूसरों पर डाली जा सके।
2. ‘वैश्विक नियमों’ के पीछे छिपा एजेंडा
एकाधिकार (Monopoly) की कोशिश: कई विश्लेषकों का मानना है कि बड़ी टेक कंपनियां (जैसे OpenAI, Google, Microsoft) जब खुद कड़े नियमों की मांग करती हैं, तो उनका मकसद नए और छोटे स्टार्टअप्स को रोकना होता है। कड़े नियमों के पालन का खर्च केवल बड़ी कंपनियां उठा सकती हैं, जिससे बाजार में उनका एकाधिकार बना रहता है।
स्वायत्तता का बचाव: वेंस जैसे रूढ़िवादी (Conservative) राजनेता अक्सर इस बात के खिलाफ रहते हैं कि सरकारें या वैश्विक संस्थाएं तकनीक पर बहुत अधिक नियंत्रण रखें, क्योंकि इससे अमेरिकी कंपनियों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता प्रभावित हो सकती है।
3. भविष्य की राह पर बहस
यह बयान दिखाता है कि अमेरिका में AI के नियमन को लेकर सरकार और सिलिकॉन वैली के बीच गहरा टकराव है। जहां एक तरफ AI से नौकरियों के जाने, डीपफेक और सुरक्षा का खतरा है, वहीं दूसरी तरफ वेंस का यह रुख साफ करता है कि सरकारें टेक कंपनियों को उनकी बनाई ‘असुरक्षित तकनीक’ के लिए खुद जवाबदेह ठहराना चाहती हैं, न कि उनके लिए सुरक्षा कवच बनना चाहती हैं।
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