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अमेरिका में वीजा से जुड़े नियमों में बड़े बदलाव की तैयारी हो रही है। ट्रंप प्रशासन ने एच-1बी वीजा समेत कुछ अन्य अस्थायी कार्य वीजा धारकों को नौकरी जाने के बाद अमेरिका में नई नौकरी या प्रायोजक तलाशने के लिए मिलने वाली 60 दिन की मोहलत खत्म करने का प्रस्ताव दिया है। प्रस्ताव लागू होने पर रोजगार समाप्त होते ही संबंधित विदेशी कामगारों को अमेरिका छोड़ना पड़ सकता है

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वासिंगटन /नई दिल्ली –अमेरिकी आव्रजन नीतियों (Immigration Policies) में इस तरह के बदलाव से वहां काम कर रहे लाखों विदेशी पेशेवर, खासकर भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स, बड़े पैमाने पर प्रभावित हो सकते हैं।60 दिनों की इस रियायती अवधि (Grace Period) के खत्म होने से जुड़ी कुछ मुख्य बातें और इसके संभावित प्रभाव नीचे दिए गए हैं:-

⚡ मुख्य प्रभाव और चुनौतियाँ-

तत्काल प्रस्थान (Immediate Departure): यदि यह प्रस्ताव कानून बनता है, तो नौकरी जाने के बाद कर्मचारियों को नया प्रायोजक (Sponsor) या वीज़ा स्टेटस बदलने का समय नहीं मिलेगा। उन्हें तुरंत देश छोड़ना पड़ सकता है।

मानसिक और वित्तीय दबाव: अचानक नौकरी जाने की स्थिति में अपना बोरिया-बिस्तर समेटना, घर का कॉन्ट्रैक्ट खत्म करना और परिवार के साथ तुरंत भारत या अपने गृह देश लौटना व्यावहारिक रूप से बहुत चुनौतीपूर्ण हो जाएगा।

प्रतिभाओं का पलायन: इस तरह के कड़े नियमों के कारण कई कुशल पेशेवर अमेरिका के बजाय कनाडा, यूके या यूरोप जैसे देशों का रुख कर सकते हैं, जहाँ आव्रजन नियम अधिक अनुकूल हैं।

–🔍 वर्तमान स्थिति और प्रक्रिया–आमतौर पर, इस तरह के बड़े नीतिगत बदलावों को सीधे लागू करने से पहले एक लंबी कानूनी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है:

पब्लिक नोटिस और कमेंट पीरियड (Notice and Comment Period): किसी भी नियम को अंतिम रूप देने से पहले प्रशासन को इसे सार्वजनिक करना होता है, जिस पर आम जनता, कंपनियाँ और कानूनी विशेषज्ञ अपनी आपत्तियां और सुझाव दर्ज करा सकते हैं।कंपनियों का विरोध: टेक दिग्गज (जैसे Google, Microsoft, Meta) इस तरह के बदलावों का कड़ा विरोध करती हैं, क्योंकि वे विदेशी प्रतिभाओं पर काफी निर्भर हैं।कानूनी चुनौतियाँ: अक्सर ऐसे कड़े नियमों को अमेरिकी अदालतों में चुनौती दी जाती है, जिससे इनके लागू होने पर रोक (Stay) लग जाती है।

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