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हरियाणा नाम का ऐतिहासिक महत्व और राज्य के कुछ जिलों की खूबियां – एडिटर, कृष्णराज अरुण समाज जागरण 24tv.कॉम

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चण्डीगढ़/ पंचकूला —
आज अपने दर्शक पाठकों को इस वेब एप चैनल द्वारा विकसित भारत की रप्तार में हरियाणा नाम और उससे जुड़े वैभव को बताने चेताने की कोशिश की जा रही है ताकि वे हरियाणा के महान महत्व से परिचित हो सकें और सम्भवतय ऐसे कार्य करें जिससे राज्य उनका जिला नगर ग्राम क्षेत्र उनकी कार्य भूमिका से और भी प्रसिद्द हो सके। समाज जागरण 24TV की खास पहल है जिसे कई किस्तों में पूरा हरियाणा कवर किया जायेगा —
आइये जानिये हरियाणा का ऐतिहासिक महत्व –
हरियाणा नाम का शाब्दिक अर्थ
“भगवान का निवास” है, जो इसकी समृद्ध आध्यात्मिक और ऐतिहासिक विरासत को दर्शाता है। हरियाणा शब्द संस्कृत के दो शब्दों, ‘हरि’ (भगवान विष्णु) और ‘अयान’ (घर या निवास स्थान) से मिलकर बना है।
हरियाणा नाम का ऐतिहासिक महत्व—
वैदिक भूमि: हरियाणा की भूमि को भारतीय संस्कृति और सभ्यता का उद्गम स्थल माना जाता है, जहाँ माना जाता है कि ब्रह्मा ने प्राचीन पूजा की थी। कई आवश्यक वैदिक ग्रंथों, उपनिषदों और आरण्यकों की रचना इसी क्षेत्र में हुई थी।
महाभारत का केंद्र: यह क्षेत्र प्रसिद्ध भरत राजवंश का घर था, जिसने भारत को ‘भारत’ नाम दिया। कौरवों और पांडवों के बीच हुआ महाकाव्य युद्ध, महाभारत, कुरुक्षेत्र में लड़ा गया था, जहाँ भगवान कृष्ण ने अर्जुन को भगवद गीता का उपदेश दिया था।
अन्य प्राचीन नाम: प्राचीन काल में, इस क्षेत्र को ब्रह्मावर्त, आर्यावर्त, और ब्रह्मोपदेश जैसे नामों से भी जाना जाता था, जो इसकी पवित्रता और वैदिक संस्कृति के साथ गहरे जुड़ाव को उजागर करता है।
युद्धों का मैदान: भारतीय इतिहास के कई निर्णायक मोड़ इस भूमि पर हुए हैं, जिनमें पानीपत की तीन ऐतिहासिक लड़ाइयाँ शामिल हैं, जिन्होंने भारतीय इतिहास की दिशा बदल दी।

राज्य के कुछ प्रमुख जिलों की खूबियां
हरियाणा के प्रत्येक जिले का अपना अनूठा महत्व और विशेषताएं हैं:

पानीपत: इसे “बुनकरों का शहर” या “वस्त्र नगरी” के नाम से जाना जाता है। यह शहर भारतीय इतिहास में अपनी तीन निर्णायक लड़ाइयों (1526, 1556 और 1761 ईस्वी) के लिए प्रसिद्ध है।

कुरुक्षेत्र: यह एक पवित्र जिला है जिसे “धर्म नगरी” कहा जाता है। यहीं पर महाभारत का युद्ध हुआ था और भगवान कृष्ण ने गीता का उपदेश दिया था। ब्रह्म सरोवर और ज्योतिसर जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल यहाँ स्थित हैं। जिसका उजाड़ तीर्थों का विकास पूर्व पीएम जो कैथल लोकसभा से दो बार सांसद भी रहे श्री गुलज़ारीलाल नंदा ने 1968 में कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड की स्थाप्पना करके 22 साल के नेतत्व करके परम् सहयोगी रहे बंसीलाल सरकार सहयोग से कुरुक्षेत्र को जिला बनवाया और इसी धर्मनगरी का आकर्षण पुरे एशिया में पहला मानव निर्मित ब्रह्मसरोवर और संहित सरोवर का विकास किया जिसमे सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण में लाखों श्रद्धालु लाभ लेते हैं।
गुरुग्राम (गुरुग्राम): यह भारत के प्रमुख सूचना प्रौद्योगिकी (IT) और ऑटोमोबाइल केंद्रों में से एक के रूप में उभरा है। इसे “मेडिसिटी” और हरियाणा की आर्थिक राजधानी भी माना जाता है।
हिसार: यह एक ऐतिहासिक शहर है जिसे “स्टील सिटी” या “इस्पात नगरी” के नाम से जाना जाता है। यह जिला अपने गर्म मौसम और कृषि महत्व के लिए भी जाना जाता है।
अंबाला: इसे “वैज्ञानिक नगरी” के रूप में जाना जाता है, क्योंकि यहाँ वैज्ञानिक उपकरणों का एक बड़ा बाजार और उत्पादन केंद्र है। इसका नाम अंबा देवी के मंदिर या यहाँ आमों की प्रचुरता के कारण पड़ा माना जाता है।
नारायणगढ – जिला बनने की कगार पर तैयार हिमाचल सीमा पर स्थित नारायण का गढ कहलाता है जिसमे प्राचीन झील तालाब रूप में चर्चित है इसे कई रूपों में इतिहास से जोड़ा गया है जैसे लाहा टोका साहिब और भूरेवाला चर्च चर्चित है। नारायणगढ से जुड़ा कालाआम हिमाचल सीमा से जुड़ा प्रसिद्द तिर्लोकपुर माता का मंदिर हिमाचल में स्थित है। ऐतिहासिक मंदिरों गुरुद्वारों से सज्जित शांति प्रिय शहर कई ऐतिहासिक धरोहरों से सज्जित है। जबकि नारायणगढ़ राजा का तालाब स्थित भगवान शिव मंदिर ब्रह्मलीन ओमानंद जी महाराज की समाधि से जुड़ा सामाजिक मान्यता के लिए चर्चित है।
जींद: यह हरियाणा के सबसे पुराने जिलों में से एक है और इसे “हरियाणा की दूध नगरी” के रूप में भी जाना जाता है।उद्यम अविष्कारों में भी जींद का अपना ही महत्व है।
पंचकुला पांच नहरों को मिलाकर कैसे बना पंचकूला –
(पांच) और “कुला” (नहरें) शब्दों से मिलकर पंचकूला का नाम “पंच” बना है, जिसका अर्थ है “पांच नहरों का शहर”। यह नाम पांच सिंचाई नहरों के कारण पड़ा है, जो घग्गर नदी से पानी लेकर नाडा साहिब से माता मनसा देवी तक फैलाती थीं।
नाम की उत्पत्ति: यह नाम सीधे तौर पर पांच सिंचाई नहरों से जुड़ा है, जो प्राचीन काल में नदी से पानी लेती थीं और उसे खेतों तक पहुंचाती थीं।
नहरों का काम: ये नहरें घग्गर नदी का पानी इकट्ठा करती थीं और उसे नीचे की ओर ले जाती थीं, जो कुछ स्थानों पर नदी के जल स्तर से भी ऊंचा होता था।
वर्तमान स्थिति: वर्तमान में इन नहरों में से एक सिंह नाला भी है, जिसे 2021 में पैदल मार्ग बनाकर सुंदर बनाया गया है।
मोरनी हिल्स – बहादुर रानी का इतिहास सज्जित यह शिवालिक पहाड़ियों में सुंदर पर्यटन है जो नजदीक चण्डीगढ़ -पंचकूला या रायपुर रानी मार्ग पर हरियाणा का स्विजरलैंड कहे जाने वाली मोरनी हिल्स का किला और पांडवकालीन से पहले ही प्रसिद्द झील टिककर ताल अनेक मान्यताओं के लिए प्रसिद्द है अपने अपने आप में सौंदर्य का खजाना लिए मोरनी हरियाणा में पहाड़ों की रानी है।

 

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